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अद्भुत उदारता  [छोटी सी कहानी]
Story To Read - Wisdom Story (Spiritual Story)

बंगालके सुप्रसिद्ध ब्रह्मसमाजी सत्पुरुष अघोरनाथजीके पिता श्रीयादवचन्द्र राय फारसी तथा संस्कृत भाषाके उच्चकोटिके विद्वान् थे, ईश्वरभक्त थे और अत्यन्त दयालु थे। वे बहुत ही त्यागी तथा परिग्रहरहित व्यक्ति थे। एक रात्रि उनके घरमें चोर घुसे चोरोंने घरका एक-एक कोना छान मारा; किंतु ले जाने योग्य कोई वस्तु उन्हें मिली नहीं। श्रीयादवचन्द्रजी जाग रहे थे।चोरोंकी गतिविधि देख रहे थे। वे धीरेसे उठे और चिलममें तम्बाकू भरकर हुक्का लिये चोरोंके सामने आ खड़े हुए। नम्रतापूर्वक बोले-'भाइयो! आपलोगोंने परिश्रम बहुत किया; किंतु लाभ कुछ नहीं हुआ। अब कृपा करके तम्बाकू तो पीते जाइये।' बेचारे चोर तो लज्जा और ग्लानिके मारे श्रीयादवचन्द्रजीके पैरोंपर ही गिर पड़े।



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adbhut udaarataa

bangaalake suprasiddh brahmasamaajee satpurush aghoranaathajeeke pita shreeyaadavachandr raay phaarasee tatha sanskrit bhaashaake uchchakotike vidvaan the, eeshvarabhakt the aur atyant dayaalu the. ve bahut hee tyaagee tatha parigraharahit vyakti the. ek raatri unake gharamen chor ghuse choronne gharaka eka-ek kona chhaan maaraa; kintu le jaane yogy koee vastu unhen milee naheen. shreeyaadavachandrajee jaag rahe the.choronkee gatividhi dekh rahe the. ve dheerese uthe aur chilamamen tambaakoo bharakar hukka liye choronke saamane a khada़e hue. namrataapoorvak bole-'bhaaiyo! aapalogonne parishram bahut kiyaa; kintu laabh kuchh naheen huaa. ab kripa karake tambaakoo to peete jaaiye.' bechaare chor to lajja aur glaanike maare shreeyaadavachandrajeeke paironpar hee gir pada़e.

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