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श्रीहनुमत्-कृपा

मुझे सन् १९२५ ई० में एक परमज्ञानी और साधनामें लवलीन पं०श्रीमेवारामजीका सत्संग प्राप्त हुआ। तब मैं मात्र १५ वर्षका था। पं० मेवारामजीने कहा- 'यदि हनुमान्जीका अनुष्ठान किया जाय तो शनिकी दशाका प्रकोप नष्ट हो जायगा।' मैंने हनुमान्जीका अनुष्ठान करना स्वीकार किया। पण्डितजीने विधि बता दी कि 'एक' सौ आठ पाठ हनुमान चालीसाके नित्य करो और चालीस दिन ऐसे पाठ करनेसे एक अनुष्ठान हो जायगा। इससे सब दुःख दूर हो जायँगे। हनुमान्जी या तो प्रकट होकर दर्शन देंगे या और किसी रूपमें कृपा करेंगे।'

मैंने होस्टलमें एकान्त कमरेमें रहते हुए चालीस दिनका अनुष्ठान आरम्भ कर दिया। एक सौ आठ पाठ रोज करता। पाठ करते-करते मनमें बड़ी शान्ति,प्रसन्नता और शक्ति उत्पन्न हो रही थी। किंतु सत्ताईस दिन ही इस प्रकार पाठ हो पाया कि एक बड़ा विघ्न उपस्थित हुआ। मैं बीमार पड़ गया। अनुष्ठानके समय मैं एक ही समय भोजन करता तथा भूमिपर शयन करता था। बीमारी इतनी बढ़ी कि बचनेकी आशा न रही, पर उसी बीमारीमें श्रीहनुमान्जीने स्वप्नमें साक्षात् दर्शन देकर कहा - 'तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। तुम्हारे पिताजीकी शनिदशाका सब कष्ट नष्ट हो जायगा। किंतु हमारी मूर्ति धारण करो। शौच और स्नानके समय उतारकर रख देना । पूजाके समय जब भुजापर बाँध लिया करोगे तो तुमको कोई विघ्न न होगा।' श्रीहनुमान्जीकी कृपासे कष्टका शीघ्र ही निवारण हुआ और मैंने अपनी दाईं भुजापर मूर्ति अंकित करा ली।

[ भक्त श्रीजयसियारामजी ]



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shreehanumat-kripaa

mujhe san 1925 ee0 men ek paramajnaanee aur saadhanaamen lavaleen pan0shreemevaaraamajeeka satsang praapt huaa. tab main maatr 15 varshaka thaa. pan0 mevaaraamajeene kahaa- 'yadi hanumaanjeeka anushthaan kiya jaay to shanikee dashaaka prakop nasht ho jaayagaa.' mainne hanumaanjeeka anushthaan karana sveekaar kiyaa. panditajeene vidhi bata dee ki 'eka' sau aath paath hanumaan chaaleesaake nity karo aur chaalees din aise paath karanese ek anushthaan ho jaayagaa. isase sab duhkh door ho jaayange. hanumaanjee ya to prakat hokar darshan denge ya aur kisee roopamen kripa karenge.'

mainne hostalamen ekaant kamaremen rahate hue chaalees dinaka anushthaan aarambh kar diyaa. ek sau aath paath roj karataa. paath karate-karate manamen bada़ee shaanti,prasannata aur shakti utpann ho rahee thee. kintu sattaaees din hee is prakaar paath ho paaya ki ek bada़a vighn upasthit huaa. main beemaar pada़ gayaa. anushthaanake samay main ek hee samay bhojan karata tatha bhoomipar shayan karata thaa. beemaaree itanee badha़ee ki bachanekee aasha n rahee, par usee beemaareemen shreehanumaanjeene svapnamen saakshaat darshan dekar kaha - 'tumhaara manorath poorn hogaa. tumhaare pitaajeekee shanidashaaka sab kasht nasht ho jaayagaa. kintu hamaaree moorti dhaaran karo. shauch aur snaanake samay utaarakar rakh dena . poojaake samay jab bhujaapar baandh liya karoge to tumako koee vighn n hogaa.' shreehanumaanjeekee kripaase kashtaka sheeghr hee nivaaran hua aur mainne apanee daaeen bhujaapar moorti ankit kara lee.

[ bhakt shreejayasiyaaraamajee ]

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