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मूर्ख छन्दानुरोधेन  [Shikshaprad Kahani]
Story To Read - Hindi Story (हिन्दी कहानी)

मिरजका अधिकारी दिलेलखान रातमें गश्त लगाता जयराम स्वामीके कीर्तनमें पहुँचा। स्वामीने कहा- 'साधुके रास्तेसे जानेपर तत्काल रामका दर्शन मिलता है।' दूसरे दिन तड़के जयराम स्वामी बुलाये गये खानने कहा - 'साधु जिस रास्तेसे जाय, मैं चलनेको तैयार हूँ; मुझे आप रामका दर्शन करा दें। नहीं तो झूठ कहनेके लिये आपको कठोर दण्ड भुगतना पड़ेगा।

जाइये, कलतक इसकी व्यवस्था कीजिये।'

जयराम स्वामी बड़े ही असमंजसमें पड़ गये। लगे हाथ वे नदीके किनारे पहुँचे। समर्थ आह्निक कर रहे थे। सारी घटना सुनाकर समर्थसे उन्होंने इस विपत्तिसे उबारनेकी प्रार्थना की। पहले तो उन्होंने जयराम स्वामीको दुत्कार दिया, पर पीछे तैयार हो गये।

खानको सूचना भेजी गयी कि 'आज ही तुम्हें रामके दर्शन कराये जायँगे। हमलोग आह्निकसे निवृत्त होकर चल रहे हैं। तुम हमारे पीछे-पीछे आना।'खान आकर तैयार हो गया। समर्थ और जयराम स्वामी भी निवृत्त हो चल पड़े। खान उनके पीछे-पीछे चलने लगा ।

कुछ दूर जानेपर मिरजका किला आया। किलेके बाहर कुछ छेद बने थे, जो भीतरसे बंदूकोंका वार करनेके काममें आते थे। समर्थ सूक्ष्म रूप बनाकर चटसे उसके भीतर घुस गये। भीतरसे ही जयराम स्वामीसे कहा- 'चले आओ वे भी भीतर चले आये।

फिर समर्थने खानसे कहा- 'खान ! तुम भी जल्दी इसी रास्ते चले आओ, साधु-संत इसी रास्तेसे आये हैं। देखो, ये रामचन्द्र खड़े हैं। जल्दी आओ और उनके दर्शन कर लो।'

खान अपनी मूर्खता और दुष्टतापर बड़ा ही लज्जित हुआ। उसने समर्थसे क्षमा माँगी और भविष्यमें किसी हिंदू साधुसे छेड़-छाड़ न करनेका वचन दिया।

-गो0 न0 बै0 (समर्थांचे सामर्थ्य)



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moorkh chhandaanurodhena

mirajaka adhikaaree dilelakhaan raatamen gasht lagaata jayaraam svaameeke keertanamen pahunchaa. svaameene kahaa- 'saadhuke raastese jaanepar tatkaal raamaka darshan milata hai.' doosare din tada़ke jayaraam svaamee bulaaye gaye khaanane kaha - 'saadhu jis raastese jaay, main chalaneko taiyaar hoon; mujhe aap raamaka darshan kara den. naheen to jhooth kahaneke liye aapako kathor dand bhugatana pada़egaa.

jaaiye, kalatak isakee vyavastha keejiye.'

jayaraam svaamee bada़e hee asamanjasamen pada़ gaye. lage haath ve nadeeke kinaare pahunche. samarth aahnik kar rahe the. saaree ghatana sunaakar samarthase unhonne is vipattise ubaaranekee praarthana kee. pahale to unhonne jayaraam svaameeko dutkaar diya, par peechhe taiyaar ho gaye.

khaanako soochana bhejee gayee ki 'aaj hee tumhen raamake darshan karaaye jaayange. hamalog aahnikase nivritt hokar chal rahe hain. tum hamaare peechhe-peechhe aanaa.'khaan aakar taiyaar ho gayaa. samarth aur jayaraam svaamee bhee nivritt ho chal pada़e. khaan unake peechhe-peechhe chalane laga .

kuchh door jaanepar mirajaka kila aayaa. kileke baahar kuchh chhed bane the, jo bheetarase bandookonka vaar karaneke kaamamen aate the. samarth sookshm roop banaakar chatase usake bheetar ghus gaye. bheetarase hee jayaraam svaameese kahaa- 'chale aao ve bhee bheetar chale aaye.

phir samarthane khaanase kahaa- 'khaan ! tum bhee jaldee isee raaste chale aao, saadhu-sant isee raastese aaye hain. dekho, ye raamachandr khada़e hain. jaldee aao aur unake darshan kar lo.'

khaan apanee moorkhata aur dushtataapar bada़a hee lajjit huaa. usane samarthase kshama maangee aur bhavishyamen kisee hindoo saadhuse chheda़-chhaada़ n karaneka vachan diyaa.

-go0 na0 bai0 (samarthaanche saamarthya)

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श्री राधा श्री राधा, श्री राधा श्री
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सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए॥
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मैं तक्दी रह गयी नी सहेलियो लगदा बड़ा
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