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परिश्रमका फल  [Hindi Story]
Moral Story - Spiritual Story (छोटी सी कहानी)

[11] परिश्रमका फल

एक किसानको खेती बहुतसे गुर मालूम थे, परंतु उसके पुत्रोंमें उन्हें सीखनेका धैर्य नहीं था। उसे अही चिन्ता हुई कि मेरी मृत्यु के बाद ये लड़के कैसे अपनी आजीविका चलायेंगे। एक दिन उसने उन लोगोंको बुलाकर कहा, 'पुत्रो, मैं अब इहलोकसे प्रस्थान करनेवाला हूँ। मेरी जो कुछ सम्पत्ति थी. उसे अमुक खेतके भीतर ढूँढ़ने से पा सकोगे। पुत्रों सोचा कि पिताजीने उन-उन स्थानोंके भीतर अपना गुप्त धन गाड़ रखा है।
किसानकी मृत्युके बाद गुप्त धनके लोभ में उन लोगोंने उन स्थानोंको खोद डाला अत्यन्त परिश्रमके साथ बहुत खोदनेपर भी उन्हें खेतोंके बीच कोई गुप्त धन नहीं मिला, परंतु जमीनकी बड़ी अच्छी खुदाई हो जानेके कारण उस वर्ष उसमें इतनी फसल हुई कि उन लोगोंको अपने परिश्रमका पूरा फल मिल गया और खेती विषयक एक महत्वपूर्ण शिक्षा भी मिल गयी।



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parishramaka phala

[11] parishramaka phala

ek kisaanako khetee bahutase gur maaloom the, parantu usake putronmen unhen seekhaneka dhairy naheen thaa. use ahee chinta huee ki meree mrityu ke baad ye lada़ke kaise apanee aajeevika chalaayenge. ek din usane un logonko bulaakar kaha, 'putro, main ab ihalokase prasthaan karanevaala hoon. meree jo kuchh sampatti thee. use amuk khetake bheetar dhoondha़ne se pa sakoge. putron socha ki pitaajeene una-un sthaanonke bheetar apana gupt dhan gaada़ rakha hai.
kisaanakee mrityuke baad gupt dhanake lobh men un logonne un sthaanonko khod daala atyant parishramake saath bahut khodanepar bhee unhen khetonke beech koee gupt dhan naheen mila, parantu jameenakee bada़ee achchhee khudaaee ho jaaneke kaaran us varsh usamen itanee phasal huee ki un logonko apane parishramaka poora phal mil gaya aur khetee vishayak ek mahatvapoorn shiksha bhee mil gayee.

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