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सद्व्यवहार  [हिन्दी कथा]
आध्यात्मिक कहानी - छोटी सी कहानी (Story To Read)

सेठ रमणलाल भगवान् के भक्त तथा साधुस्वभावके थे ।। एक बार रसोइयाने भूलसे हलुएमें चीनीकी पुरुष जगह नमकका पानी बनाकर डाल दिया और तरकारियोंमें नमककी जगह चीनी डाल दी। वह अपनी पत्नीकी बीमारीके कारण रातभरका जगा हुआ था और पत्नीकी रुग्णताके कारण उसके मनमें चिन्ता भी थी। इसीसे भूल हो गयी। सेठ रमणलाल भोजन करने बैठे तो उन्हें हलुआ नमकीन और तरकारी मीठी किंतु बिना नमककी मालूम हुई। उन्होंने रसोइयाके चेहरेकी ओर देखा, उसका चेहरा उदास था। सेठने हार्दिक सहानुभूतिके स्वरमें उससे पूछा-'महाराज ! आज उदास कैसे हो ?' लाभशंकर रसोइयाने जवाब दिया-'ब्राह्मणी बीमार है, इसीसे चेहरेपर कुछ मलिनता आ गयी होगी।' उसने रात जगनेकी बात नहीं कही। पर सेठ उसकी उनींदी आँखोंको देखकर ताड़ गये। उन्होंने कहा-'लाभशंकर!'तुम खाकर जल्दी घर चले जाओ-ब्राह्मणी अकेली है, उसे सँभालो; यहाँ दूसरा आदमी काम कर लेगा। तुम भला, आये ही क्यों। फिर भैया! तुम्हारे घरमें दूसरा कोई है भी तो नहीं। तुम रातभर जगे भी होओगे ! मैं एक आदमी भेजता हूँ, वह बैठेगा। तुम कुछ देर आराम कर लेना।' रसोइयाको बड़ी सान्त्वना मिली। वह मन-ही-मन आशीर्वाद देता हुआ घर चला गया।

लाभशंकरके चले जानेपर सेठ रमणलालने अपनी पत्नी चम्पाबाईसे धीरेसे कहा-'देखो, बेचारा डरके मारे स्त्रीको बीमार छोड़कर कामपर आ गया। रातकी नींद थी और ब्राह्मणीकी चिन्ता थी। इससे उसने भूलसे हलुएमें नमक और तरकारियोंमें चीनी डाल दी है। अगर इन चीजोंको घरके सब लोग, नौकर-चाकर आदि खायेंगे तो बेचारे ब्राह्मणकी हँसी उड़ायेंगे और उसेभारी दुःख होगा। अतएव ये चीजें गोशालामें ले जाकर गायोंको खिला दो और जल्दीसे दूसरी बार हलुआ तरकारी बनवा लो, जिसमें लाभशंकरकी भूलकाकिसीको पता भी न चले।' साध्वी चम्पाबाईने वैसा ही किया। बात बहुत छोटी, परंतु इससे सेठ रमणलालकी विशाल हृदयता और सदाशयताका पता लगता है!



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sadvyavahaara

seth ramanalaal bhagavaan ke bhakt tatha saadhusvabhaavake the .. ek baar rasoiyaane bhoolase haluemen cheeneekee purush jagah namakaka paanee banaakar daal diya aur tarakaariyonmen namakakee jagah cheenee daal dee. vah apanee patneekee beemaareeke kaaran raatabharaka jaga hua tha aur patneekee rugnataake kaaran usake manamen chinta bhee thee. iseese bhool ho gayee. seth ramanalaal bhojan karane baithe to unhen halua namakeen aur tarakaaree meethee kintu bina namakakee maaloom huee. unhonne rasoiyaake cheharekee or dekha, usaka chehara udaas thaa. sethane haardik sahaanubhootike svaramen usase poochhaa-'mahaaraaj ! aaj udaas kaise ho ?' laabhashankar rasoiyaane javaab diyaa-'braahmanee beemaar hai, iseese cheharepar kuchh malinata a gayee hogee.' usane raat jaganekee baat naheen kahee. par seth usakee uneendee aankhonko dekhakar taada़ gaye. unhonne kahaa-'laabhashankara!'tum khaakar jaldee ghar chale jaao-braahmanee akelee hai, use sanbhaalo; yahaan doosara aadamee kaam kar legaa. tum bhala, aaye hee kyon. phir bhaiyaa! tumhaare gharamen doosara koee hai bhee to naheen. tum raatabhar jage bhee hooge ! main ek aadamee bhejata hoon, vah baithegaa. tum kuchh der aaraam kar lenaa.' rasoiyaako bada़ee saantvana milee. vah mana-hee-man aasheervaad deta hua ghar chala gayaa.

laabhashankarake chale jaanepar seth ramanalaalane apanee patnee champaabaaeese dheerese kahaa-'dekho, bechaara darake maare streeko beemaar chhoda़kar kaamapar a gayaa. raatakee neend thee aur braahmaneekee chinta thee. isase usane bhoolase haluemen namak aur tarakaariyonmen cheenee daal dee hai. agar in cheejonko gharake sab log, naukara-chaakar aadi khaayenge to bechaare braahmanakee hansee uda़aayenge aur usebhaaree duhkh hogaa. ataev ye cheejen goshaalaamen le jaakar gaayonko khila do aur jaldeese doosaree baar halua tarakaaree banava lo, jisamen laabhashankarakee bhoolakaakiseeko pata bhee n chale.' saadhvee champaabaaeene vaisa hee kiyaa. baat bahut chhotee, parantu isase seth ramanalaalakee vishaal hridayata aur sadaashayataaka pata lagata hai!

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राधा रानी हमारी, राधा रानी हमारी॥
Ye Saare Khel Tumhare Hai Jag
Kahta Khel Naseebo Ka
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