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शब्द वापस नहीं लौटते  [प्रेरक कथा]
प्रेरक कथा - Story To Read (प्रेरक कथा)

शब्द वापस नहीं लौटते

एक किसानकी एक दिन अपने पड़ोसीसे खूब जमकर लड़ाई हुई। बादमें जब उसे अपनी गलतीका अहसास हुआ, तो उसे खुदपर शर्म आयी। वह इतना शर्मसार हुआ कि एक साधुके पास पहुँचा और कहा 'मैं अपनी गलतीका प्रायश्चित्त करना चाहता हूँ।'
साधुने कहा कि 'तिनकोंसे भरा हुआ एक थैला लाओ और उसे शहरके बीचो-बीच उड़ा दो।' किसानने ठीक वैसा ही किया, जैसा कि साधुने कहा था और फिर साधुके पास लौट आया। लौटनेपर साधुने उससे कहा 'अब जाओ, जितने भी तिनके उड़े हैं, उन्हें बटोरकर थैलेमें भर लाओ।'
नादान किसान जब वैसा करने पहुँचा तो उसे मालूम हुआ कि यह काम मुश्किल नहीं, बल्कि असम्भव है। खैर, खाली थैला ले, वह वापस साधुके पास आ गया। यह देख साधुने उससे कहा- 'ऐसा ही मुँहसे निकले शब्दोंके साथ भी होता है।'
बोलो तो तौलकर बोलो। बोले गये शब्द वापस
नहीं लौटते हैं।



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shabd vaapas naheen lautate

shabd vaapas naheen lautate

ek kisaanakee ek din apane pada़oseese khoob jamakar lada़aaee huee. baadamen jab use apanee galateeka ahasaas hua, to use khudapar sharm aayee. vah itana sharmasaar hua ki ek saadhuke paas pahuncha aur kaha 'main apanee galateeka praayashchitt karana chaahata hoon.'
saadhune kaha ki 'tinakonse bhara hua ek thaila laao aur use shaharake beecho-beech uda़a do.' kisaanane theek vaisa hee kiya, jaisa ki saadhune kaha tha aur phir saadhuke paas laut aayaa. lautanepar saadhune usase kaha 'ab jaao, jitane bhee tinake uda़e hain, unhen batorakar thailemen bhar laao.'
naadaan kisaan jab vaisa karane pahuncha to use maaloom hua ki yah kaam mushkil naheen, balki asambhav hai. khair, khaalee thaila le, vah vaapas saadhuke paas a gayaa. yah dekh saadhune usase kahaa- 'aisa hee munhase nikale shabdonke saath bhee hota hai.'
bolo to taulakar bolo. bole gaye shabd vaapasa
naheen lautate hain.

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