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गरजनेके बाद बरसना भी चाहिये  [प्रेरक कहानी]
Short Story - हिन्दी कथा (आध्यात्मिक कहानी)

सुकरातकी पत्नी अंटीपी अत्यन्त कर्कशा थी। वह अकारण ही पतिसे झगड़ा किया करती थी। एक बार किसी बातपर असंतुष्ट होकर वह सुकरातको भली-बुरी सुनाने लगी। सुकरात चुपचाप उसके कठोर वचन सुनते रहे। कोई प्रत्युत्तर न मिलनेसे उसका क्रोध बढ़ता ही गया। अन्तमें उसने एक पानी भरा बर्तन उठाकर सुकरात के सिरपर उड़ेल दिया। सुकरात बोले –'बहुतगर्जनाके बाद कुछ वर्षा भी तो होनी ही चाहिये थी।' सुकरातके एक मित्रने उनकी दुर्दशा देखकर कहा – 'ऐसी कर्कशा नारी छड़ीसे ही ठीक करने योग्य है।'

सुकरात हँसकर बोले आप चाहते हैं कि हम दोनों झगड़ें और आप तमाशा देखें ?' मित्र इस शान्त पुरुषके सम्मुख लज्जित हो गये ।

- सु0 सिं0



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garajaneke baad barasana bhee chaahiye

sukaraatakee patnee anteepee atyant karkasha thee. vah akaaran hee patise jhagada़a kiya karatee thee. ek baar kisee baatapar asantusht hokar vah sukaraatako bhalee-buree sunaane lagee. sukaraat chupachaap usake kathor vachan sunate rahe. koee pratyuttar n milanese usaka krodh badha़ta hee gayaa. antamen usane ek paanee bhara bartan uthaakar sukaraat ke sirapar uda़el diyaa. sukaraat bole –'bahutagarjanaake baad kuchh varsha bhee to honee hee chaahiye thee.' sukaraatake ek mitrane unakee durdasha dekhakar kaha – 'aisee karkasha naaree chhada़eese hee theek karane yogy hai.'

sukaraat hansakar bole aap chaahate hain ki ham donon jhagada़en aur aap tamaasha dekhen ?' mitr is shaant purushake sammukh lajjit ho gaye .

- su0 sin0

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