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जीवन-क्षण  [Spiritual Story]
आध्यात्मिक कहानी - हिन्दी कथा (शिक्षदायक कहानी)

एक बार किसीने वृद्ध संत बायजीदसे पूछा 'आपकी आयु क्या है ?" आपने उत्तर दिया- 'चार वर्ष।' वह आदमी चुप हो गया। बायजीदने समझाया'मेरे जीवनके सत्तर वर्ष सांसारिक प्रपञ्चोंमें बीते। अब केवल चार वर्षसे उस प्रभुकी ओर देख रहा हूँ। जीवनके जितने क्षण प्रभुके समीप बीते हैं, वास्तवमें वही जीवनका काल है । '

- शि0 दु0



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jeevana-kshana

ek baar kiseene vriddh sant baayajeedase poochha 'aapakee aayu kya hai ?" aapane uttar diyaa- 'chaar varsha.' vah aadamee chup ho gayaa. baayajeedane samajhaayaa'mere jeevanake sattar varsh saansaarik prapanchonmen beete. ab keval chaar varshase us prabhukee or dekh raha hoon. jeevanake jitane kshan prabhuke sameep beete hain, vaastavamen vahee jeevanaka kaal hai . '

- shi0 du0

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मीठे रस से भरी रे, राधा रानी लागे,
मने कारो कारो जमुनाजी रो पानी लागे
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जग ताने देंदा ए, तै मैनु कोई फरक नहीं
फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद
फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृन्दावन
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प्रीतम बोलो कब आओगे॥
बालम बोलो कब आओगे॥
ਮੇਰੇ ਕਰਮਾਂ ਵੱਲ ਨਾ ਵੇਖਿਓ ਜੀ,
ਕਰਮਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ਾਰਮਾਈ ਹੋਈ ਆਂ
सब के संकट दूर करेगी, यह बरसाने वाली,
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मेरा मन ही न लगे श्यामा तेरे बिना
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मेरा अवगुण भरा रे शरीर,
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फिर डरने की क्या बात है
मैं मिलन की प्यासी धारा
तुम रस के सागर रसिया हो
सावरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है ।
सारे दुःख दूर हुए, दिल बना दीवाना है ।
यशोमती मैया से बोले नंदलाला,
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मुझे तेरा ही सहारा महारानी, चरणों से
तू राधे राधे गा ,
तोहे मिल जाएं सांवरियामिल जाएं
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