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परम्परा एवं रूढ़ि  [Moral Story]
हिन्दी कथा - Spiritual Story (Wisdom Story)

(4)

परम्परा एवं रूढ़ि

परम्पराओंके जन्म और दीर्घजीवी होनेके विषय में सचेत करती हुई एक झेन कथा कहती है कि एक आश्रम में ध्यानके समय एक पालतू बिल्ली अपनी उछल-कूदसे बहुत व्यवधान करती थी। फलतः, गुरुजीकी आज्ञासे उसे ध्यानके समय रस्सी से बाँधकर रखा जाने लगा। गुरुजीके दिवंगत होनेके बाद भी ध्यानके समय बिल्ली यथावत् बाँधी जाती रही। उस बिल्लीकी मृत्यु होनेपर जानकारोंने हर ध्यानसत्रमें एक बँधी बिल्लीकी अनवरत उपस्थितिको प्रमाणित किया। फलतः, एक नयी बिल्ली मँगायी जाने लगी और उसे ध्यानके समय यथावत् बाँधकर रखा जाने लगा। शताब्दियोंके बाद उस आश्रमसे प्रकाशित प्रामाणिक साहित्यमें ध्यानके समय बिल्लीके बँधे रहनेके महत्त्वको प्रतिपादित करती हुई व्याख्याएँ प्राप्त होने लगीं।



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parampara evan roodha़i

(4)

parampara evan roodha़i

paramparaaonke janm aur deerghajeevee honeke vishay men sachet karatee huee ek jhen katha kahatee hai ki ek aashram men dhyaanake samay ek paalatoo billee apanee uchhala-koodase bahut vyavadhaan karatee thee. phalatah, gurujeekee aajnaase use dhyaanake samay rassee se baandhakar rakha jaane lagaa. gurujeeke divangat honeke baad bhee dhyaanake samay billee yathaavat baandhee jaatee rahee. us billeekee mrityu honepar jaanakaaronne har dhyaanasatramen ek bandhee billeekee anavarat upasthitiko pramaanit kiyaa. phalatah, ek nayee billee mangaayee jaane lagee aur use dhyaanake samay yathaavat baandhakar rakha jaane lagaa. shataabdiyonke baad us aashramase prakaashit praamaanik saahityamen dhyaanake samay billeeke bandhe rahaneke mahattvako pratipaadit karatee huee vyaakhyaaen praapt hone lageen.

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