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शेरको अहिंसक भक्त बनाया !  [Hindi Story]
प्रेरक कहानी - आध्यात्मिक कहानी (Moral Story)

गढ़मण्डलके राजा पीपाजी राज-काज छोड़ रामानन्द
स्वामीके शिष्य बने और उनकी आज्ञासे द्वारकामें हरि दर्शनार्थ गये। दर्शन करके अपनी पत्नीसहित लौट रहे थे कि रास्तेमें उन्हें एक महाव्याघ्र मिला । रानी शेरको देख कातर हो उठी। राजाने उसे समझाया- 'अरी! घबराती क्यों है। गुरुदेवने सर्वत्र हरिरूप देखनेका जो उपदेश दिया था, वह भूल गयी ? मुझे तो इसमें हरिरूप ही दीख रहा है। और हरिसे भय कैसा ।'

रानी कुछ आश्वस्त हुई। राजाने गलेसे तुलसी माला निकाल व्याघ्रके गलेमें डाल दी और उसे एककृष्ण-मन्त्रका उपदेश देते हुए कहा—‘मृगेन्द्र! इसे || जपो; इसीके प्रतापसे वाल्मीकि, अजामिल, गजेन्द्र | सभी तर गये।'

राजाकी निष्ठा और सर्वत्र देवदृष्टि शेरपर भी काम कर गयी। उसने हाथ जोड़ा और वह जप करने लगा। | पीपाजी वहाँसे चले गये।

सात दिनतक शेर जंगलमें घूमता, मांस त्यागकर | सूखे पत्ते चबाता हरिजप करता रहा। अन्तमें उसने | हरि-भजन करते हुए प्राण त्यागा। दूसरे जन्ममें वही जूनागढ़का परम हरिभक्त नरसी मेहता बना।

गो0 न0 बै0 (भक्तिविजय, अध्याय 26)



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sherako ahinsak bhakt banaaya !

gadha़mandalake raaja peepaajee raaja-kaaj chhoda़ raamaananda
svaameeke shishy bane aur unakee aajnaase dvaarakaamen hari darshanaarth gaye. darshan karake apanee patneesahit laut rahe the ki raastemen unhen ek mahaavyaaghr mila . raanee sherako dekh kaatar ho uthee. raajaane use samajhaayaa- 'aree! ghabaraatee kyon hai. gurudevane sarvatr hariroop dekhaneka jo upadesh diya tha, vah bhool gayee ? mujhe to isamen hariroop hee deekh raha hai. aur harise bhay kaisa .'

raanee kuchh aashvast huee. raajaane galese tulasee maala nikaal vyaaghrake galemen daal dee aur use ekakrishna-mantraka upadesh dete hue kahaa—‘mrigendra! ise || japo; iseeke prataapase vaalmeeki, ajaamil, gajendr | sabhee tar gaye.'

raajaakee nishtha aur sarvatr devadrishti sherapar bhee kaam kar gayee. usane haath joda़a aur vah jap karane lagaa. | peepaajee vahaanse chale gaye.

saat dinatak sher jangalamen ghoomata, maans tyaagakar | sookhe patte chabaata harijap karata rahaa. antamen usane | hari-bhajan karate hue praan tyaagaa. doosare janmamen vahee joonaagadha़ka param haribhakt narasee mehata banaa.

go0 na0 bai0 (bhaktivijay, adhyaay 26)

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