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दानाध्यक्षकी निष्पक्षता  [Spiritual Story]
हिन्दी कथा - Short Story (Short Story)

रामशास्त्री प्रभुणे पेशवाईके प्रमुख विचारपतिका काम कर रहे थे। साथ ही दानाध्यक्षका काम भी उन्हींके अधीन रहा। एक बार दक्षिणा बाँटते समय शास्त्री बोबाके सगे भाई दक्षिणा लेने पहुँचे। पासमें ही नाना फड़नवीस बैठे थे। नानाने कहा-

'मैं समझता हूँ, आप अपने बन्धुको बीस रुपये दक्षिणा दें।' 'मेरे भाई कोई विशेष विद्वान् नहीं, साधारण हैं।इसलिये अन्य ब्राह्मणोंकी तरह इन्हें भी दो रुपये देना
ही ठीक होगा। नाना! मेरे भाईके नाते जो कुछ इन्हें देना
हो, मैं स्वयं दूँगा । दानाध्यक्ष रामशास्त्रीके यहाँ भाई भतीजेके प्रति किसी प्रकारके पक्षपातकी गुंजाइश नहीं।' नाना फड़नबीस चुप हो गये। रामशास्त्रीने भाईको | दो रुपये दिये और वे उसे लेकर चुपचाप चलते बने।

-गो0 न0 बै0



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daanaadhyakshakee nishpakshataa

raamashaastree prabhune peshavaaeeke pramukh vichaarapatika kaam kar rahe the. saath hee daanaadhyakshaka kaam bhee unheenke adheen rahaa. ek baar dakshina baantate samay shaastree bobaake sage bhaaee dakshina lene pahunche. paasamen hee naana phada़navees baithe the. naanaane kahaa-

'main samajhata hoon, aap apane bandhuko bees rupaye dakshina den.' 'mere bhaaee koee vishesh vidvaan naheen, saadhaaran hain.isaliye any braahmanonkee tarah inhen bhee do rupaye denaa
hee theek hogaa. naanaa! mere bhaaeeke naate jo kuchh inhen denaa
ho, main svayan doonga . daanaadhyaksh raamashaastreeke yahaan bhaaee bhateejeke prati kisee prakaarake pakshapaatakee gunjaaish naheen.' naana phada़nabees chup ho gaye. raamashaastreene bhaaeeko | do rupaye diye aur ve use lekar chupachaap chalate bane.

-go0 na0 bai0

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