⮪ All भगवान की कृपा Experiences

श्रीमद्भगवद्गीता-श्रवणका अद्भुत चमत्कार

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥

(गीता ९ २२) यह प्रसंग लगभग २५ वर्ष पुराना है। सन् १९८९ ई० में मेरी बहनका विवाह हुआ था । प्रातः बारातियोंकी विदाईकी तैयारी हो रही थी। तभी अचानक मेरी माताजीको बेहोशी आ गयी, उस समय लोगोंके प्रयाससे लगभग आधे घण्टेमें होश आ गया। उस समय लोग अपने-अपने गन्तव्यको चले गये।

लेकिन इसके बाद भी महीने दो महीनेपर बेहोशी आ जाती थी। अतः इलाज करवाना आवश्यक था। फलतः आर्थिक तंगीके बावजूद इलाज करवानेहेतु उन्हें राँची (झारखण्ड) के एक सुप्रसिद्ध डॉक्टरके पास ले गया। देखकर उन्होंने रोगको हृदयरोग कहा और दवाइयाँ लिखीं। दवाइयोंका दाम पूछनेपर दुकानवालेने ६०० या ७०० रुपये बताया, जो आजीवन चलनी थीं। मैंने रुपयोंके अभावमें दवाई नहीं खरीदी और माँसे कहा कि प्रत्येक माह इतनी महँगी दवा चलानापिताजीकी आमदनीसे बहुत मुश्किल है। उस समय पिताजीको गाँवके डाकघरमें कार्य करनेके एवजमें मात्र एक हजार रुपये मासिक भत्ता मिलता था, जिसमें परिवारका खर्च और दवाईका खर्च- ये दोनों वहन करना सम्भव नहीं था। इसलिये मैंने माँसे कहा कि अब भगवान् का नाम लेकर घर चलो।

तत्पश्चात् दो-तीन दिनके बाद मेरे दिमागमें एक बात आयी कि गीता सुननेसे मोक्ष होता है तो क्यों नहीं माँको गीता सुना दें, या तो रोगसे मुक्ति होगी, नहीं तो जीवनसे। यह सोचकर उस दिनसे प्रत्येक दिन सायंकालमें घरके अन्य सदस्योंके साथ माँको गीता सुनाना प्रारम्भ किया। उस गीता-श्रवणके प्रभावसे भगवान्‌की कृपासे अभीतक (७५ वर्षकी उम्र में भी) कभी उनको बेहोशी नहीं आयी। माँ पूर्ण स्वस्थ हैं।

अतः मेरा विश्वास है कि श्रीमद्भगवद्गीतामें कही गयी बात-जो लोग अनन्य भावसे मेरी उपासना करते हैं, उनका कल्याण और उनकी रक्षा मैं स्वयं करता हूँ, बिलकुल सत्य एवं सार्थक है।

[ श्रीसत्येन्द्रजी मिश्र ]



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shreemadbhagavadgeetaa-shravanaka adbhut chamatkaara

ananyaashchintayanto maan ye janaah paryupaasate

teshaan nityaabhiyuktaanaan yogaksheman vahaamyaham ..

(geeta 9 22) yah prasang lagabhag 25 varsh puraana hai. san 1989 ee0 men meree bahanaka vivaah hua tha . praatah baaraatiyonkee vidaaeekee taiyaaree ho rahee thee. tabhee achaanak meree maataajeeko behoshee a gayee, us samay logonke prayaasase lagabhag aadhe ghantemen hosh a gayaa. us samay log apane-apane gantavyako chale gaye.

lekin isake baad bhee maheene do maheenepar behoshee a jaatee thee. atah ilaaj karavaana aavashyak thaa. phalatah aarthik tangeeke baavajood ilaaj karavaanehetu unhen raanchee (jhaarakhanda) ke ek suprasiddh daॉktarake paas le gayaa. dekhakar unhonne rogako hridayarog kaha aur davaaiyaan likheen. davaaiyonka daam poochhanepar dukaanavaalene 600 ya 700 rupaye bataaya, jo aajeevan chalanee theen. mainne rupayonke abhaavamen davaaee naheen khareedee aur maanse kaha ki pratyek maah itanee mahangee dava chalaanaapitaajeekee aamadaneese bahut mushkil hai. us samay pitaajeeko gaanvake daakagharamen kaary karaneke evajamen maatr ek hajaar rupaye maasik bhatta milata tha, jisamen parivaaraka kharch aur davaaeeka kharcha- ye donon vahan karana sambhav naheen thaa. isaliye mainne maanse kaha ki ab bhagavaan ka naam lekar ghar chalo.

tatpashchaat do-teen dinake baad mere dimaagamen ek baat aayee ki geeta sunanese moksh hota hai to kyon naheen maanko geeta suna den, ya to rogase mukti hogee, naheen to jeevanase. yah sochakar us dinase pratyek din saayankaalamen gharake any sadasyonke saath maanko geeta sunaana praarambh kiyaa. us geetaa-shravanake prabhaavase bhagavaan‌kee kripaase abheetak (75 varshakee umr men bhee) kabhee unako behoshee naheen aayee. maan poorn svasth hain.

atah mera vishvaas hai ki shreemadbhagavadgeetaamen kahee gayee baata-jo log anany bhaavase meree upaasana karate hain, unaka kalyaan aur unakee raksha main svayan karata hoon, bilakul saty evan saarthak hai.

[ shreesatyendrajee mishr ]

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